서울 까마귀(현대시인선 208)
함축된 언어의 예술, 시를 통해 저자는 자신의 생각과 창의성을 과감없이 발휘한다. 그 속에 담긴 감성과 사색이 독자를 시의 세계로 끌어들여 문학적 감수성을 깨운다. 자신만의 작품 세계를 구축해온 저자의 다양한 시 작품을 감상해보자.
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출판사 리뷰
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목차
목차
제1부
4월에 온 편지 ----- 10
개미지옥 ----- 12
내 안의 강물 ----- 13
반성문 ----- 14
단풍 ----- 15
물소리 ----- 16
생명 연습 ----- 18
서울 까마귀 ----- 20
서울 까치 ----- 22
여의도 밤섬의 겨울 ----- 24
배추밭 ----- 26
사람과 짐승 ----- 27
고로쇠 ----- 28
제2부
물고기가 운다고? ----- 30
사마귀를 위한 변명 ----- 32
개구리 울음소리 ----- 34
닥터 피시 ----- 36
개 머리를 묻으며 ----- 38
고추잠자리 ----- 40
까치 집 ----- 41
개 끈 ----- 42
결빙의 강 ----- 43
고향 까마귀 ----- 44
개 잘 있지요 ----- 46
도심공원에서 ----- 48
제비가족에게 ----- 50
손길 놓기 ----- 52
도비도에서 ----- 53
제3부
언 발을 녹여주다 생긴 버릇 ----- 56
노리개 젖꼭지 ----- 57
눈사람 ----- 58
옹알이 ----- 59
휘파람을 불어요 ----- 60
착한 떡잎 ----- 62
대리운전 ----- 63
그리운 인기척 ----- 64
뻥치지 말라고 ----- 66
눈 속으로 ----- 67
돌고래 제돌이에게 ----- 68
크리스마스 트리 ----- 70
불경기 ----- 72
제4부
막걸리 ----- 74
고향 마을 ----- 75
땅 냄새 ----- 76
까마종이에 물을 주며 ----- 78
비의 나라 ----- 80
빈병 두 개 ----- 82
얼음 깨무는 소리 ----- 84
천국 ----- 86
엄마 아들 ----- 87
빨리 오징어가 나야 할 낀데 ----- 88
엄마와 힘겨루기 ----- 90
칼 가는 노인 ----- 92
나를 감춘 부끄러움 ----- 93
치과를 나오며 ----- 94
제5부
입춘 ----- 96
풍선 ----- 97
숲속의 이변異變 ----- 98
만추 ----- 99
조약돌 ----- 100
장어를 기다리며 ----- 102
얼굴 ----- 104
로드킬 ----- 106
첫눈 ----- 108
전어 축제 ----- 110
횟집에서 ----- 112
여울목 물소리 ----- 113
▨ 발문 | 이근배 ----- 114
▨ 장승기의 시세계 | 김광한 ----- 119
저자
저자
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